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एक गे के जज बनने पर अड़ा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम :जानिए क्या है कारण

जालंधर (ब्यूरो):- केंद्र ने RAW की रिपोर्ट के आधार पर वकील सौरभ कृपात के नाम को जज के लिए अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिर नाम भेजा है। सुप्रीम कोर्ट की विवादित कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सुप्रीम कोर्ट के समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल (Gay Advocate Saurabh Kripal) को दिल्ली हाईकोर्ट का न्यायाधीश (Delhi High Court Judge) नियुक्त करने की फिर सिफारिश की है।

हालाँकि केंद्र ने इस सिफारिश को मानने से इनकार कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कृपाल के नाम पर अड़ा हुआ है और उनके नाम को दोबारा 18 जनवरी 2023 को भेजा है।

केंद्र सरकार का कहना है कि मे राइट्स (Gay Rights) के बारे में सौरभ कपात का जो रुझान है उसे देखते हुए उन्हें इस मामले में पूर्वाग्रह से ग्रसित होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उनके पार्टनर के विदेशी होने का हवाला दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कृपाल का पार्टनर स्विस नागरिक है इस तर्क को आधार नहीं बनाया जा सकता। कॉलेजियम ने कहा कि वर्तमान और पूर्व में कई ऐसे लोग उच्च संवैधानिक पदों रहे हैं जिनका पति या पत्नी विदेशी है कॉलेजियम ने पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायण और वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर का उदाहरण दिया।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने यह भी कहा कि RAW ने कृपाल के व्यक्तिगत आचरण या व्यवहार को लेकर किसी तरह की आशंका व्यक्त नहीं की है। ऐसे में उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा कैसे प्रभावित होगी? कॉलेजियम ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी यौन इच्छा को बनाए रखने का अधिकार है। यह मानवीय गरिमा से जुड़ा मामला है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड (CJI DY Chandrachud) की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम में न्यायमूर्ति एसके कोल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने बयान में कहा है, कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सौरभ कृपात की नियुक्ति के लिए 11 नवंबर 2021 की अपनी सिफारिश को दोहराया है जिस पर तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता है।”

कौन है सौरभ कृपाल

भाई भतीजावाद को लेकर केंद्र सरकार के निशाने पर आया सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बीएन कृपाल के बेटे सौरभ कृपात को “बनाना चाहता है। कृपात को वकालत का 20 सात का अनुभव है। मार्च 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कृपाल का सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया था। कृपाल ने ग्रेजुएशन दिल्ली के सेंट स्टीशंस कॉलेज से की है। इसके बाद वे अमेरिका के ऑक्सफोर्ड यूनिर्सिटी से तो में ग्रेजुएशन किया। उसके बाद विज पुनिवर्सिटी सेतों में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है।

कृपाल ने संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ जेनेवा में भी काम किया है। कृपात का नाम पहली बार सुर्खियों में नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ के केस में सामने आया था। इस केस में वह समलैंगिकता से संबंधित धारा 377 को हटाने के लिए याचिकाकर्ता के वकील थे। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को खत्म कर दिया था। इतना ही नहीं सौरभ कृपा अपनी सेक्सुअल ओरिएंटेशन को खुले तौर पर स्वीकार करने के लिए भी जाने जाते हैं। कुपात के में पार्टनर स्विस नागरिक निकोलस जर्मन बाकमेन (Nicolas Germain Bachmann) है। बाकमेन स्विस दूतावास के साथ काम करते हैं। इसी सेक्सुअल ओरिएशन केंद्र सरकार की का एक प्रमुख कारण हैं।

पाँच सात से लटका है कृपात का मामला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा कि सौरभ कृपात का मामला पाँच सात से पेंडिंग है। 13 अक्टूबर 2017 को दिल्ली हाईकोर्ट की कॉलिजियम ने उनका उनका नाम प्रस्तावित किया था। इस प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट के सभी 31 जजों में इसे लेकर सर्वसम्मति थी। प्रस्तावित किया था। इस प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट के सभी 31 जजों में इसे लेकर सर्वसम्मति थी। उनके नाम को 4 सितंबर 2018 16 जनवरी 2010 1 अप्रैल 2010 और 2 मार्च 2021 को SC कॉलेजियम ने आगे बढ़ाया। मार्च 2021 में तीन सीई

बोबड़े ने केंद्रीय कानून मंत्री को पत्र लिखकर कृपाल की नियुक्ति पर आपत्तियों को स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद 11 नवंबर 2021 को यूलित एएम खानविलकर और तकालीन सीजेआई मावा कयम ने कृपाल के नाम को सरकार के भेजा। हालांकि केंद्र सरकार ने कई तरह की आपत्तियों को गिनवाते हुए 25 नवंबर 2022 को इसे वापस कर दिया। बता दें कि कॉलेजियम को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के बीच खींचतान जारी है। उपराष्ट्रपति जगदीप मंत्री किरेन रिजिजू तक सवाल उठाते रहे हैं। किरन रिजिजू ने गुरुवार (15 जनवरी 2023) को फिर कहा कि केंद्र सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है न्यायपालिका की स्वतंत्रता आवश्यक है।