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एसटीएफ सोनीपत की टीम ने हत्या के प्रयास, रंगदारी मांगने समेत ; 16 मामलों में बदमाश रोहतक निवासी धर्मेंद्र को किया गिरफ्तार

मान्यवर:-एसटीएफ सोनीपत की टीम ने हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी मांगने समेत 16 मामलों में नामजद व फरार पैरोल जंपर रोहतक के गांव रुड़की निवासी धर्मेंद्र उर्फ शास्त्री को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने उसे पलवल से गिरफ्तार किया है। हत्या के मामले में उम्रकैद के सजायाफ्ता धर्मेंद्र की गिरफ्तारी पर रोहतक पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। आरोपी पहचान व धर्म बदलकर बिहार में छिपकर रह रहा था।

एसटीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने रविवार को बताया कि जानकारी मिली थी कि धर्मेंद्र उर्फ शास्त्री किसी वारदात को अंजाम देने के लिए पलवल में आ रहा है। पुलिस ने नाकाबंदी कर उसे दबोच लिया। आरोपी को 4 फरवरी, 2003 में रोहतक के सांपला थाना क्षेत्र में हुई रिवाड़ा के अजीत की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है जिसमें वह जुलाई, 2015 में भोंडसी जेल से पैरोल लेकर फरार हो गया था। उसके खिलाफ रोहतक में 29 जुलाई, 2015 को पैरोल जंपर होने का मुकदमा दर्ज हुआ था जिसमें आरोपी की गिरफ्तारी पर रोहतक पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम रखा था।

आरोपी हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान में वारदात को अंजाम देकर बिहार में जाकर छिप जाता था। आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा। एसटीएफ के अनुसार आरोपी धर्मेंद्र को मादक पदार्थ तस्करी के आरोपी में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में फरारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वहां उससे 180 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। वहां आरोपी ने अपना फर्जी पहचान पत्र सुलतान खान के नाम से दिया था जिससे वह वहां पकड़ में नहीं आ सका था। वहां उसे जमानत मिल गई थी।

एसटीएफ प्रभारी ने बताया कि आरोपी वारदात कर बिहार भाग जाता था। वह बिहार के किशनगंज स्थित दामलबाड़ी में नाम व पहचान बदलकर छिपता था। उसने वहां अपना नाम सुलतान खान रख लिया था। इतना ही नहीं दामलबाड़ी में उसने वर्ष 2015 में ही अंसारी बेगम उर्फ निशा से निकाह कर लिया था। वह दूसरे प्रदेशों में वारदात को अंजाम देने के बाद बिहार भाग जाता था।

आरोपी धर्मेंद्र उर्फ शास्त्री पर वर्ष 2017 में बहादुरगढ़ में एक्वालाइट जूता कंपनी के मालिक से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में एक पुलिस कर्मी का नाम भी आया था। जिसने बाद में आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में धर्मेंद्र की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। आरोपी धर्मेंद्र पर वर्ष 2003 में सोनीपत में एलआईसी दफ्तर में अपने साथियों संग मिलकर करीब साढ़े 19 लाख रुपये की लूट का आरोप है।