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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अकाली दल में बगावत, विधायक अयाली ने द्रौपदी मुर्मू को वोट देने से किया इनकार, कहा- पार्टी ने नहीं ली सलाह

जालंधर(ब्यूरो): राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अकाली दल में बगावत, विधायक अयाली ने द्रौपदी मुर्मू को वोट देने से किया इनकार, कहा- पार्टी ने नहीं ली सलाह, राष्ट्रपति चुनाव को लेकर शिरोमणि अकाली दल (बादल) में बगावत हो गई है। अकाली दल के विधायक मनप्रीत अयाली ने भाजपा समर्थित NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मु को वोट देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इस चुनाव का बहिष्कार करते हुए किसी को वोट न देने की बात कही है।

इससे पहले अकाली दल की कोर कमेटी की मीटिंग के फैसले के बाद प्रधान सुखबीर बादल ने मुर्मु को समर्थन दिया था। अयाली ने कहा कि मुर्मु से मेरा कोई विरोध नहीं लेकिन वोट नहीं दूंगा। कांग्रेस से सिखों के मसले हल होने की उम्मीद नहीं थी, मनप्रीत अयाली ने कहा कि पंजाब देते वक्त पंजाबी बोलने वाले इलाके नहीं दिए गए। चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है लेकिन आज तक पंजाब को नहीं दिया गया। पंजाब के पानी के मसले हल नहीं किए गए। जबरन SYL नहर निकालने की शुरूआत भी केंद्र की कांग्रेस सरकार ने की। सिखों के कत्लेआम और दरबार साहिब पर हमले कांग्रेस ने करवाए। कांग्रेस से हमें सिख कौम के मसलों के हल की उम्मीद नहीं थी।

भाजपा से उम्मीद थी लेकिन कुछ नहीं किया, भाजपा से हमें बहुत उम्मीद थी। भाजपा की केंद्र में सरकार आने के बावजूद मसले हल नहीं हुए। कारण जो भी हों लेकिन मसले हल नहीं हुए। पार्टी की तरफ से वोट डालने का फैसले को लेकर मुझसे कोई सलाह नहीं की गई। इस बारे में सिख कौम से भी राय नहीं ली गई। मैंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों से भी बात की। सबसे सलाह लेने के बाद पंथ की भावनाओं को देखते हुए बहिष्कार करने का फैसला लिया है। भाजपा सरकार में पंजाब का हक छीना जा रहा, भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार में पंजाब के हक छीने जा रहे हैं। हरियाणा को चंडीगढ़ में विधानसभा के लिए जमीन देने, पंजाब यूनिवर्सिटी का केंद्रीकरण, BBMB का मसला, बंदी सिखों की रिहाई और चंडीगढ़ में केंद्रीय नियम लागू करने जैसे कई मामलों में पंजाब के साथ धक्केशाही हो रही है।

पार्टी में तब्दीली की मांग, मनप्रीत अयाली ने कहा कि शिअद से पंजाब के लोगों और सिख कौम को बड़ी उम्मीदें हैं। इसको लेकर इकबाल झूंदा की रिपोर्ट में जो भी आए, उसे लागू करना चाहिए। पार्टी में जो तब्दीली की जरूरत है, उसे करना चाहिए ताकि पार्टी फिर से लोगों की सेवा करने में समर्थ हो सके। अकाली दल को राज के पीछे भागने के बजाय सिखों के हक के लिए लड़ना चाहिए। इसी से लोगों का भरोसा कायम होगा।