मान्यवर:-भारत के लिए गौरव का पल आ गया है। हरनाज संधू ने साउथ अफ्रीका और पराग्वे को पीछे छोड़ते हुए मिस यूनिवर्स का ताज अपने नाम कर लिया है। 2017 में हरनाज ने मिस चंडीगढ़ का खिताब जीता था।
टॉप तीन प्रतियोगियों से सवाल पूछा गया था कि आप दबाव का सामना कर रहीं महिलाओं को क्या सलाह देंगी? इस पर हरनाज संधू ने जवाब दिया, आपको यह मानना होगा कि आप अद्वितीय हैं और यही आपको खूबसूरत बनाती है। बाहर आएं, अपने लिए बोलना सीखें क्योंकि आप अपने जीवन के नेता हैं। देशभर में खुशी की लहर है। हरनाज ने पहले भारत की दो और सुंदरियों ने देश का मान बढ़ाया है।
भारत को पहली बार 1994 में मिस यूनिवर्स का ताज दिलाया था हैदराबाद में जन्मीं सुष्मिता सेन ने। उस समय सुष्मिता की उम्र सिर्फ 19 साल थी। इतनी छोटी उम्र में सुष्मिता सेन वो पहली भारतीय महिला बनीं जिन्होंने मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया।
सुष्मिता से मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के दौरान पूछा गया कि यदि आप किसी ऐतिहासिक घटना को बदल सकतीं, तो वो क्या होती? इस पर सुष्मिता ने कहा था, ‘इंदिरा गांधी की मृत्यु’। सुष्मिता के इसी जवाब ने उन्हें मिस यूनिवर्स का खिताब दिलाया।
लारा दत्ता ने साल 2000 में मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया था। सुष्मिता सेन के बाद मिस यूनिवर्स बनने वाली लारा दत्ता दूसरी भारतीय महिला बनीं। लारा उस वक्त 22 साल की थीं। बता दें कि लारा का इंटरव्यू किसी भी कैटेगरी में रिकॉर्ड किया हुआ सबसे लंबा इंटरव्यू रहा। उन्हें 9.99 नंबर मिले थे।
लारा दत्ता से सवाल किया गया था- ब्यूटी कॉन्टेस्ट वुमन्स के लिए रिस्पेक्फुल नहीं? कैसे साबित करेंगी कि ये बात गलत है? लारा ने जवाब दिया था- मैं समझती हूं कि मिस यूनिवर्स जैसी प्रतियोगिताएं यंग वुमन के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म हैं। इसी के माध्यम से हम आगे बढ़ सकते हैं और हम जिस फील्ड में जाना चाहे जा सकते हैं। हम बिजनेस, राजनीति सहित अन्य फील्ड में काम कर सकते हैं। हम मजबूती से अपनी राय, अपने विचार रख सकते हैं।