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मुम्बई के कांदिवली ईपीएफओ दफ्तर में हुआ बड़ा घोटाला

मान्यवर:-देश में बड़ा PF घोटाला हुआ है | क्लर्क की मिलीभगत से करोड़ों की धांधली हुई है | चौंकाने वाला मामला दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संस्था यानी EPFO दफ्तर से जुड़ा है | घोटाले का मामला मुम्बई के कांदिवली PF दफ्तर से जुड़ा है | यहां काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने  21 करोड़ रुपए से अधिक की रकम PF पूल से चुरा ली | PF दफ्तर की इंटरनल जांच में इस फ्रॉड और घोटाले का खुलासा हुआ | मुंबई के कांदिवली EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि घोटाले में अब तक 7 लोगों को निलंबित किया जा चुका है | पहले इस मामले में 5 लोगो को सस्पेंड किया गया था अब 2 और लोगो को सस्पेंड किया गया | जिन 2 लोगों को सस्पेंड किया गया उसमें एक असिस्टेंट कमिश्नर पद का कर्मचारी है |

मुम्बई के कांदिवली यूनिट 2 के PF दफ्तर में काम करने वाले क्लर्क और कुछ अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से घोटाला हुआ है | PF दफ्तर की अंदरूनी जांच में इस फ्रॉड और घोटाले का खुलासा हुआ | मुख्य संदिग्ध 37 साल का चंदन कुमार सिन्हा है जो इसी EPFO दफ्तर के चारकोप ब्रांच (यूनिट 2) में क्लर्क है | संदेह है कि इसने अपने सहकर्मी क्लर्क अभिजीत ओनेकर सहित कुछ अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का घोटाला किया | इनकी मॉड्स कुछ इस तरह की होती थी कि यह मजदूर, जरूरतमंद, रिक्सा चालक लोगो के बैंक अकाउंट और आधार डिटेल को हासिल करते थे | इनके PF खाते खोले जाते थे और इनके PF खाते में PF पूल से 5 लाख रुपए से कम की रकम ट्रांसफर की जाती थी |

जांच में पता चला की, चंदन और अभिजीत ने 817 बैंक अकाउंट और आधार कार्ड की मदद से करोड़ों रुपये मजदूरों के PF खाते में भेजे | जिन मजदूरों के PF अकाउंट खोले गए उन्हें उन कंपनियों का कर्मचारी बताया गया जो साल 2006 में बंद हो चुकी हैं  | PF खातों से पैसे मजदूरों के बैंक अकाउंट में भेजे गए | बैंक अकाउंट से पैसे निकाला जाता और जिस मजदूर के अकाउंट से रकम निकाला जाता उन्हें  5000-10000 रुपए कमीशन दिया जाता था | इस घोटाले में संदेह में आए कर्मचारियों को ऑडिट की प्रक्रिया की जानकारी थी | इन्होंने खामियां सामने नहीं आने दी | बंद हुए कंपनी का EPFO डबल एंट्री नही करती है | कोरोना काल मे अधिकतर लोगों ने PF के पैसे निकाले इस दौरान सरकार द्वारा नियंमो में ढील दी गई जिससे लोग आसानी से PF का पैसा निकाल सके |

कोरोना संकटकाल के दौरान वरिष्ठ अधिकारी घर पर थे | वरिष्ठ अधिकारियों ने क्लर्क को अपना पासवर्ड दिया और बाद में पासवर्ड बदला नहीं | इसका फायदा उठाकर लाखों रुपये PF पूल से मजदूरों, फर्जी लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में भेजे गए | यह रकम 5 लाख से कम होती थी इसलिए यह जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के सामने नहीं आती थी | अगर ट्रासंफर की गई रकम 5 लाख से अधिक हो तो वरिष्ठ अधिकरी इसे देखते हैं |

अंदरूनी जांच के बाद आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा | जांच CBI को देने की मांग की जाएगी | कांदिवली चारकोप यूनिट 2 के PF दफ्तर में 2 सालों में जिन अकॉउंट से पैसे निकाले गए उसका ऑडिट होगा | 12 लाख अकाउंट की ऑडिट होगी | अन्य EPFO दफ्तर में भी इंटरनल ऑडिट और PF पैसे ट्रासंफर देने की प्रक्रिया के लिए नियमों को पालने के निर्देश दिए गए हैं | अब तक कोई FIR नहीं दर्ज कराई गई है | EPFO वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद CBI को केस दिया जाएगा | निजी PF खातों को कोई खतरा नहीं है | किसी व्यक्ति, कंपनी का कोई नुकसान नहीं बल्कि PF दफ्तर संस्था का नुकसान है | जांच में पाया गया कि 90% पैसे निकाले जा चुके हैं |